Wednesday, July 20, 2011

गलत तो गलत है


खून किसी का भी बहे,मौत किसी की भी हो,जख्म किसी के भी जिस्म पर उभरे,गम और दर्द का होना लाजिमी है। लेकिन दुनिया में ऐसे भी इंसान हैं। जिन्हें खून बहाने,मौत का खेल खेलने और जख्म देने में मजा आता है। वैसे पत्थर दिल इंसानों के लिए ये मायने नहीं रखता कि,कौन अपना है और कौन पराया। उन्हें मतलब है तो सिर्फ और सिर्फ रक्तचरित्र करने से। जरा सोचिए...जब एक ही छत के नीचे दो ऐसे लोग मौजूद हों। जिनमें से एक को अमन चैन पसंद है तो दूसरे को तबाही। इतना ही नहीं अगर दोनों के बीच पति- पत्नी का रिश्ता हो तो ?। जाहिर सी बात है सामंजस बैठाना बड़ा ही मुश्किल होगा। इस हालात पर और कुछ कहूं उससे पहले थोड़ी देर के लिए अतीत में चलते हैं। दरअसल,अहमदाबाद पुलिस ने शहजाद रंगरेज नाम के एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया। जो अपने घर में तबाही का सामान यानी बम बनाता था। पुलिस को शहजाद के घर से 8 देसी बम और कई कारतूस बरामद हुए। हैरानी की बात ये है कि,शहजाद के बारे में पुलिस को जानकारी देने वाली कोई और नहीं बल्कि उसकी बेगम रेशमा थी। जिसने पुलिस को फोन कर बताया कि,उसके घर में बम है। रेशमा मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बाद लोगों की चीख पुकार सुन इस कदर टूट गई कि,उसने अपने शौहर की करतूतों को उजागर कर दिया। रेशमा को उसकी इस हिम्मत के लिए गुजरात सरकार ने सम्मानित भी किया है। सम्मान पाने के बाद उसने कहा कि,वो अपने पति को ऐसा करने से मना भी करती थी। लेकिन वो नहीं माना। यहां तक कि,शहजाद ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। पर रेशमा ने उसकी परवाह नहीं की। वो कहती है "पति के जेल जाने का उसे ग़म है,लेकिन उसने पति के आतंकी मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिए,इसकी खुशी है।" अब आते हैं हालात पर। रेशमा चाहती तो अपने पति के बारे में किसी को नहीं बताती। लेकिन उसके जमीर ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी। उसने सुहाग के आगे घुटने नहीं टेके। हालात से समझौता नहीं किया। उसने एक शख्स का ख्याल नहीं किया। बल्कि उसने पूरे मुल्क के आवाम के लिए सोचा। आज भी ही वो अपने शौहर से अलग होकर अकेली है। पर वो जानती है कि,पूरा वतन उसके साथ है। हमारे बीच रेशमा ने एक साथ कई मिसाल बना दिए हैं। मसलन गलत को गलत कहने का और फैसला लेने का।




Thursday, July 14, 2011

अशुभ है 13 तारीख



मुंबई के बारे में कहा जाता है कि,ये शहर कभी सोता नहीं है। जिंदगी यहां चौबीसों घंटे दौड़ती रहती है। शायद इसीलिए आतंकियों की गंदी निगाह इस शहर के अमन चैन को तबाह करने पर लगी रहती है।
आतंकियों ने कई बार इस शहर को निशाना बनाया है। खासकर 13 तारीख, इस शहर के लिए सबसे मनहूस तारीख साबित हुई है।आतंक के आकाओं ने 13 मार्च 2003 को ट्रेन में बम ब्लास्ट किया। जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। इस तारीख को आज भी मुंबई वाले याद कर सहम जाते हैं। इसके बाद 13 मई 2008 को मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुआ। जिसमें कई बेगुनाहों की मौत हो गई। इसके अलावा अगर देश के बाकी हिस्सों में भी धमाकों की तारीख को याद करें तो,13 को और भी कई वारदातें हुईं हैं। दिल्ली में 13 सितंबर 2008 को सिलसिलेवार धमाके हुए। जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई और और सौ से ज्यादा लोग जख्मी हुए। महाराष्ट्र के पुणे में 13 मई 2010 को जर्मन बेकरी में हुए जोरदार ब्लास्ट में कई लोगों की सांसे रुक गई। देश के लोग जहां 13 तारीख को अपनी डायरी में काली स्याही से लिखने को मजबूर हैं। वहीं आतंकियों ने इस तारीख को लाल स्याही से दर्ज करने की कसम खा ली है।

है कोई इनसे खूबसूरत ?









सऊदी अरब की क्वीन फातिमा कुलसुम जौहर गोदावरी की खूबसूरती।