Monday, January 17, 2011

अतीत से सबक लेने का वक़्त



पूर्णिया के विधायक राज किशोर केसरी की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई होगी.उसकी हत्या करने वाली रूपम पाठक और उसकी माँ का गुस्सा अभी शांत भी नहीं हुआ कि उतर प्रदेश के बांदा से एक और विधायक का कारनामा सामने आ गया .बांदा की रहने वाली और दुष्कर्म की शिकार हुई नाबालिग युवती के मुताबिक बसपा के विधायक पुरषोत्तम नरेश दिवेदी ने उसके साथ दुष्कर्म किया.और पुलिस में शिकायत करने पर पुलिस वाले उसे इन्साफ देने के बजाय जेल भेज दिया.हलाकि है हाईकोर्ट के आदेश के बाद युवती रिहा हो गई.पर रिहाई के बाद उसने अपने गुस्से का इजहार कुछ इस तरह किया."फांसी की सजा हो उसको.अब वो जेल से न निकलने पाय.और जो उसके आदमी है.उनको भी उसी तरह मारा कुटा जाय.जिस तरह मुझको मारा है.जेल में बंद करके सजा दी जाय .मुझे न्याय तभी मिल पायेगा.जब मेरे साथ दुष्कर्म करने वाले विधायक को फांसी होगी.और कानून सजा नहीं दे पाया तो मैं उससे बदला लूंगी".इस बयान पर गौर करने के बाद इतिहास की याद आती है.जिस लड़की के साथ विधायक ने दुष्कर्म किया वो निषाद है.और ज़रा याद कीजिये दस्यु सुन्दरी फूलन देवी को.उसने भी दुष्कर्म के बाद बागी तेवर अपनाया था.उसके गुस्से के खौफ से हम सब वाकिफ है.इसीलिए ज़रूरी है.पीड़ित लकड़ी को न्याय मिलना.ताकि राज किशोर केसरी और पुरषोत्तम जैसे विधायक के हवस का शिकार कोई और न बन सके.और किसी युवती को हथियार उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े.वक़्त आ गया है.जब हम अतीत से सबक लेकर एक मिसाल कायम करें..

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